Sunday, December 4, 2011

उसे प्यार करने वाला ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है....

क्या बोलू मेरा गम, किसी और से ज्यादा है या कम |
लेकिन जितना भी है, तकलीफ तो मुझे ही दे जाता है ||
तुम्हे पाकर दुबारा अब जीने की चाहत रह -रहकर बाकि है |||
अब तो तुम्हारी एक अधूरी सी नज़र भी उम्मीद जगा जाती है |||

कोई कहानी अधूरी नहीं होती है |
अगर उसे कोई अपने जीवन से जोड़कर बताता है ||
लेकिन बस समय की कम और उसकी मजबूर है |||
जो वो उसे पूरी नहीं कर पाता है ||||

फिर भला कोई क्यों आधे जाग और आधे सोते हुए |
जीवन के सुन्दर सपने बुनता है ||
अपना सपनों का घर बनाता है |||

लेकिन जब उसका सामना जीवन की कठोरता से होता है |
तब वो तड़पता ही रह जाता है ||
और उसे प्यार करने वाला ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है |||
जितनी तकलीफे और दर्द बड़े से बड़ा जख्म नहीं देता ||||
उससे कई गुना वो बस मुंह फेरकर दे जाता है |||||

7 comments:

  1. Beautiful poem with lot of pain portrayed. The satisfaction is never achieved. 'PYAS ADHURI HI RAH JATI HAI. HAR KOI TADPATA HAI VO PANE KE LIYE JO PA KAR BHI NAHI SULJATI HAI PYAS. KABHI TO SAMAJ ME NAHI ATA KI HAM KISKE PICHE PADE HAI??

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  2. उनकी यादों का दिया बनाकर ... ढूंढ लीजिए अंधेरों में रोशनी ... इंतज़ार के रथ पर बैठे समय का सारथि प्रभात की किरण की ओर धकेल रहा है चाबुक की चुभन भी मखमली बन जायेगी .. उगने वाले सूरज का एह्शास गर होगा....पर तबतक इस दिये को बुझने ना देना सिसकियों से घुलती गहरी सी साँस ही तो है इसका तेल ..

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  3. dhanywad Atul Shrivastava ji..

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  4. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति .....

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