Saturday, June 9, 2012

जो दुनिया में हम आज जिन्दा हैं ??


आज आसमा से जमीन
दूर हो गयी है ,
हम तो बेसहारे है ,
इस बेवफा जहाँ में |

जो हमने बुलबुलों में
नीला आसमान छुपा रखा है |
तो सुनले वो मेरी भी कहानी |

की तक़दीर में प्यार की तलाश,
ओ मेहबूब तेरे दिल के पास ही थी ..|

जो दुनिया में हम आज जिन्दा हैं ??
तो वो है, इस अधूरे प्यार की अधूरी आश में |


5 comments:

  1. क्या खूब लिखा है आपने .....कमाल हैं आप भी !

    बहुत सुंदर कविता के लिए हृदय से आभार और बधाई !

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    1. धन्यवाद आभार आपका ..

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  2. बेहतरीन अभिव्यक्ति सुंदर कविता,,,,, ,

    MY RECENT POST,,,,काव्यान्जलि ...: ब्याह रचाने के लिये,,,,,

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  3. (¯`'•.¸*♥♥♥♥*¸.•'´¯)
    ♥बहुत सुन्दर प्रस्तुति♥
    ♥(¯`'•.¸*♥♥*¸.•'´¯)♥
    ♥♥(¯`'•.¸**¸.•'´¯)♥♥
    -=-सुप्रभात-=-
    (¸.•'´*♥♥♥♥*`'•.¸)

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  4. बुलबुलों में छिपा नीला आसमान...................

    वाह...
    बहुत सुन्दर.

    अनु

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