Friday, June 29, 2012

हाय रे बेचारे दिल ....

वो ना लोटे पलटकर ,  पर हमें ...
भूलने की शुरुआत कर दी |
तो हमनें भी चाहा भुला दे ...उनको ,
भला  बुझती हुई लों के साथ, 
कौन जलता है  ???

कह दिया-- की वो बेवफा है ...
उन्होंने प्यार में रुसवाई कि है |

पर जब वो हमारे पास से गुजरे ...
दिल ने कहा -- जरा देख लूँ ,
 " बस एक नज़र "
आखिर जो भी हो ....
सामने से मेरा प्यार आ रहा है |

तब मेरे मन ने कहा - हाय रे बेचारे दिल ,
तू क्या सोचता है , जिसने तेरे प्यार को भूल मानकर ..
उसकी जिन्दा चिता जलाई है .. और एक तू है ... 
जो उस  राख  में प्यार की उम्मीद खोजता है |

5 comments:

  1. dil me pyar ka dard liye khoobsoorat pantiyan.

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति,,,सुंदर रचना,,,,,

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: बहुत बहुत आभार ,,

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  3. आपका बहुत - बहुत आभार ...

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  4. बढिया....
    गहरे भाव

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  5. भूलने की शुरुआत कर दी |....... क्‍या बात है

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