Tuesday, June 26, 2012

बीते हुए लम्हों की कसक...


जो दिया था तुमने एक दिन ..
हम ना समझे थे ... उन वादों को
लेकिन अब तो चलना होगा,
जुबा पर दर्द ही सजाकर  ... |


बीते हुए लम्हों की कसक...
दिल के टुकड़े कर जाती है,
छुड़ाकर तुमसे ये प्यार का दामन,
भला हम, ख़ुशी लेकर भी करे क्या ??


हाँ ... हैं ये मजबूरी, की कैसे हसें अब ...?
एक अधूरी सी मुलाकात हुई थी जहाँ,
मिलन की घड़ी तो थी पल भर की ...
और बिछड़ने का ग़म हर रात जगाता है |



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