Sunday, June 17, 2012

हुनर हमसे सीखोगे ....

जुबा पे बात क्यों रह जाती है ,
जो कहना चाहते हो कह दे ...
या तो हां होगी या ना ,
अंजाम से क्यों डरते हो ??

छुपाने का अब क्या ??
हुनर हमसे सीखोगे ....
एक हम है , 
जो सब कहकर ..
भी तनहा रह जाते है |

ना समझना कुछ मांगकर 
नज़र नहीं मिला पाओंगे ...
जो बोलोगे कुछ दिल से ..
तभी तो दिल में बस पाओंगे |




6 comments:

  1. ना समझना कुछ मांगकर
    नज़र नहीं मिला पाओंगे ...
    जो बोलोगे कुछ दिल से ..
    तभी तो दिल में बस पाओंगे |

    वाह ,,, बहुत बेहतरीन सुंदर रचना,,,,,

    RECENT POST ,,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

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  2. धन्यवाद धीरेन्द्र जी आभार .......

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  3. दिल की बात दिल में ही हो तो बेहतर है.... वर्ना ना सूननें की आदत हमारी नही अब दिल में बसाओ या दिमाग में क्‍या फर्क पडता है .......

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  4. dhanywad aap sabhika aabhar ...

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