Friday, June 29, 2012

छोटी सी दुनिया ही नसीब है ..

हम अपनी जगह है ,
गिरे सावन की थमी,
बूँदों की तरह ,
जो जहाँ गिरे .....
तो खुद को ही छुपा लिया  ...|

रूट के हमसे तो खुश है , ख़ुशी ..
जो अब दिलजले कहलाये , 
तो दिल कुछ शुकून पाता है |

ओ साथी ,, तेरे बिना ....
मेरे मन को अब तो ,
छोटी सी दुनिया ही नसीब है ..|

जहाँ सिर्फ  रोशनी नहीं मिलती ,
और साँस लेने की हवा ..
दुसरो से लेनी पड़ती है |



17 comments:

  1. yar tum to ek book publish kar do........

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  2. very expressive verses...
    small world that surrounds us.. confined with in which we spend our lives..

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  3. बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  4. बहुत सुन्दर भाव,,,,,

    बस कुछ टाइपिंग की गलतियां खटक रहीं है ठीक कर लीजिए ...

    सस्नेह
    अनु

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (01-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  6. SUNDER BHAW LIYE UTTAM RACHNA.

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  7. वाह जी बल्‍ले बल्ले

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  8. क्या कहने
    बहुत सुंदर रचना

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  9. आप सभी का बहुत - बहुत आभार ....

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  10. गहरे अहसास लिए...
    कोमल भाव व्यक्त करती
    बहुत सुन्दर रचना...
    :-)

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  11. भावनात्मक प्रस्तुति.

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  12. बहुत सुन्दर कोमल एहसास बढ़िया रचना

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  13. सुन्दर/कोमल एहसासात.... बढ़िया रचना....
    सादर।

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  14. धन्यवाद आभार ...

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